Premchand quotes in hindi

(मुंशी प्रेमचंद) munshi premchand quotes in hindi

स्वार्थ की माया अत्यन्त प्रबल है | ~ प्रेमचंद

केवल बुद्धि के द्वारा ही मानव का मनुष्यत्व प्रकट होता है | ~ प्रेमचंद

कार्यकुशल व्यक्ति की सभी जगह जरुरत पड़ती है | ~ प्रेमचंद

दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। -प्रेमचंद

सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है, जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं | ~ प्रेमचंद

कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता | कर्तव्य-पालन में ही चित्त की शांति है | ~ प्रेमचंद

नमस्कार करने वाला व्यक्ति विनम्रता को ग्रहण करता है और समाज में सभी के प्रेम का पात्र बन जाता है | ~ प्रेमचंद

अन्याय में सहयोग देना, अन्याय करने के ही समान है | ~ प्रेमचन्द

आत्म सम्मान की रक्षा, हमारा सबसे पहला धर्म है | ~ प्रेमचन्द

यश त्याग से मिलता है, धोखाधड़ी से नहीं | ~ प्रेमचन्द

जीवन का वास्तविक सुख, दूसरों को सुख देने में हैं, उनका सुख लूटने में नहीं | ~ मुंशी प्रेमचंद

लगन को कांटों कि परवाह नहीं होती | ~ प्रेमचंद

उपहार और विरोध तो सुधारक के पुरस्कार हैं | ~ प्रेमचंद

जब हम अपनी भूल पर लज्जित होते हैं, तो यथार्थ बात अपने आप ही मुंह से निकल पड़ती है | ~ प्रेमचंद

अपनी भूल अपने ही हाथ सुधर जाए तो,यह उससे कहीं अच्छा है कि दूसरा उसे सुधारे | ~ प्रेमचंद

विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई विद्यालय आज तक नहीं खुला | ~ मुंशी प्रेमचंद

आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन गरूर है | ~ प्रेमचन्द

सफलता में दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है | ~ प्रेमचन्द

डरपोक प्राणियों में सत्य भी गूंगा हो जाता है | ~ प्रेमचंद

चिंता रोग का मूल है। – प्रेमचंद

चिंता एक काली दिवार की भांति चारों ओर से घेर लेती है, जिसमें से निकलने की फिर कोई गली नहीं सूझती। – प्रेमचंद

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18 Responses to Premchand quotes in hindi

  1. paramanu urja ka parwana, karega jagath ko suhana

  2. i would like to share slogans

  3. d k himanshu says:

    Amiri ki kabra per panpi hui garibi badi jahrili hoti hai…..Premchand

  4. khushbu says:

    स्वार्थ की माया अत्यन्त प्रबल है | ~ प्रेमचंद

  5. dhan singh verma says:

    प्रेमचंद जी समाज में समरसता और समानता के पक्षधर थे। उनका लेखन समाज के हित के लिए था। मैं उन्हें शत शत नमन करता हूँ। जयहिंद, जयभारत।

  6. Santosh pandey says:

    “jis tan ko jite ji chithada naseeb nahi hota use marane ke baad naya kafan chahiye”

    munshi ji ji gahraiyo ko na to koi chhoo paya hai aur na hi chhoo payega.

  7. Divyanshi jain says:

    Nice quotes and written in simple language to be understood by any ordinary person.

  8. Rishav Raj says:

    ise padh ke kisi ki bhi life badal jaye

  9. rakeshsatija says:

    i read old books and like hindi writer but some quotes lession to our life

  10. rakeshsatija says:

    I like hindi writter and my devotional item like Mr. Munshi prem chand also likenirmala karambhumi, gaban etc.

  11. PRABHANSHU KAMAL AHIRWAR says:

    VERY INSPIRATIONAL QUOTES

  12. md danish says:

    apki quotes ne mujhe diwana kar diya apki story ne mujhe padhai ke parti mashtana kar diya guru dashina mein kya dun main apko ak dil he tha jo apko najrana kar diya *** abdul kalam***

  13. आपने यहाँ पर मुंशी प्रेमचन्‍द के बहुत अच्‍छे अनमोल वचनाें को लिखा। इससे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। जैसे मुंशी प्रेम चन्‍द एक बहुत ही सरल व्‍यक्ति थे उसी प्रकार की उनकी वाणी भी थी जो कि इन अनमोल वचनाें से झलक रही है। इसे हमारे साथ बाटने के लिए धन्‍यवाद!
    Mohit Mishra(http://www.allinhindi.com)

  14. anukriti says:

    amiri ka kabra par panpi hui garibi bari jahrili hoti hai:-
    munsi premchand

  15. somya tripathi says:

    it is inspirational quotes of my life

  16. धैर्य निराशा की अंतिम सीमा है !
    आशा में कितनी सुधा है !

  17. Today (31 July) is the birth anniversary of Munshi Premchand, one of India’s greatest novelists and short-story writers, besides a grand thinker. His understanding of thoughts on religion, politics and above all about human values was simply superb and much ahead of his time which can be observed in his writings.
    I feel that he was and is a true mirror of our society.
    What is happening today in the name of caste, religion, inequality and above all politics can be seen in his captivating expressions.
    But, here my pen stops. A period of eight decades has passed, when the genius passed away in 1936.
    Did he got the recognition, he richly deserved. Certainly not.
    In the national capital Delhi, we have Tolstoy Marg, Max Muller Marg, Copernicus Marg. Very good!
    But sadly, we never thought of naming a prominent road as Munshi Premchand Marg.
    Is any one listening !

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