कबीर के दोहे – ज्ञा

ज्ञान रतन का जतनकर माटी का संसार ।
आय कबीर फिर गया, फीका है संसार ।1।

ज्ञान समागम प्रेम सुख, दया भक्ति विष्वास।
गुरू सेवा ते पाइये, सदुरू चरण निवास।2।

ज्ञानी को ज्ञानी मिलै, रस की लूटम लूट।
ज्ञानी को आनी मिलै, हौवै माथा कूट।3।

ज्ञानी अभिमानी नहीं, सब काहू सो हेत ।
सत्यवार परमारथी, आदर भाव सहेत ।4।

ज्ञान सपूरण न भिदा, हिरदा नाहिं जुड़ाय।
देखा देखी भक्ति का, रंग नहीं ठहराय।5।

ज्ञानी होय सो मानही, बूझै शब्द हमार।
कहैं कबीर सो बांचि है, और सकल जमधार।6।

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One Response to कबीर के दोहे – ज्ञा

  1. Very Nice and Usefull collection for Students.

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